Thursday, 17 November 2016

बंधे हो तो जाने क्यों

इकिस साल का था जब मेरी प्रभु येशु से मुलाकात हुई। में खुद को भक्त जनोमें सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता और न ही में मेरे परिवार द्वारा सिखाये गए आचार विचार पर चलने वाला इंसान। आप अगर अपने निजी सगे संबंधियों पर गौर करेंगे तो आप भी मेरी इस बात पर सहमत होंगे की कच्चे धागों से बंधे हुए रिश्ते अक्सर हमें कुछ कच्चे पक्के रीति रिवाजों से हमें बाँध रखते है और हमें हमारे इर्द गिर्द के पूरे इलाके एक जैसे लोग दिखने लगते है।  हमें अक्सर ये लगने लगता है की हमारे पिता के जो दोस्त है वोह एक विचार धरा से बंधे है।  हमें यह भी एहसास होता है की हमारे माताश्री के परिवार और सहेलिया कुछ अलग है पर वोह भी हमारे परिवार और अडोस पड़ोस के विचार धाराओं में ढले हुए है।  

कुछ ही दिनों में हम बड़े हो जाते है और शाधि ब्याह रचा कर एहसास कर पते है की हमारा जग एक विचार धाराओं के अंतर का एक माह सागर है जिसमें हम डूबे हुए है। इन विचार धाराओं की उलझन ऐसी की हम जब तक इसमें तैरना सीखते हैं हमे धीरे धीरे ये एहसास होने लगता है की इस वास्तव में हमारे इर्द गिर्द के सरे लोग सामाजिक व्यवस्था के परे एक अपना भी जहाँ इनका खुद का होता है जहाँ ये चैयन की तलाश में भटक रहे होते है।  हमें अचानक ये लगने लगता है की हमे अपने ही लोक में चैन की अवक्ष्यता थी तो हम किसलिए सामाजिक व्यवस्था के अनुसार बहने की कोशिश कर रहे थे।  

इसलिए ध्यान रखें, बंधी न बने।  बंधक न बने दार्शनिक एवं खोखले और विचारधाराओं से जो बंधे हो परंपराओं से और अधपके ऊपरी ज्ञान से।  सारी सृस्टि जिसने बनाई, सब कुछ जिसने अपने लिए बनाया हु इसा मसि ही मार्ग है , सत्य है और जीवन है।  उसे जाने। बंधे हो तो जाने क्यों। जरूरत नहीं है की सब जिए है जैसे वही सर्वोत्तम हो। परमात्मा ने हमें क्यों बनाय इस बात का अगर हमें ज्ञान मिले तो व्हो हमारे लिए ऐसी बंधन है जो हमें आज़ाद केरे।  

पिता पुत्र और पवित्र आत्मा में हमारी विजय है।


नमस्कार। में लिंसन आपको अपने ब्लॉग पर पाके बेहद पर्सन हूँ।  आपने मुझे अपना समय चुराने का मौका दिया है, इस समय का में साद उपयोग करूँ ये मेरी जरूरत भी है और मेरी जिमेदारी भी. आप चाहे किसी भी मुल्क के हो, आप अपने को किसी भी जाती या समुदाय के मानते हो आप में मेरी दिलचस्पी सिर्फ इसलिए है की आप मेरे प्रभु परमेश्वर के संतान हो और इस हिसाब से परमेश्वर में आप मेरे भाई बंधू हो.

प्रभु येशु मसि के संतान अगर ऊंच नीच की बातें करें तो उसका परिचय प्रभु से अभी होनी बाकि है. प्रभु ने हमें अपने अपने अलग गुणों से हम सब को अलग बनाया जरूर हैं पर हमारी भिन्ताएं हमें दूसरों को नीच या ऊँचा   करार देने के लिए नहीं पर प्रभु की गुणवक्ता उसमें हम महसूस करें इस के लिए उसने हमें एक दुसरे से प्यार करने को बताया।

भारतीय समाज में इस विषय पर हमारी समझ बहुत भावुक और भद्दा है। भावुक इसलिए क्योंकि हम धार्मिक और आर्थिक व्यवस्था के अनुसार हम अपने को ही बड़ा या चोट मान लेतें है। भूक और गरीबी में हम पैसे वालों पर निर्भर हो जातें हैं। जिस खुदा ने हमें बनाया वो हमारी ज़र्रोरतें पूरी करने में सक्षम है ये बताने वाले हमारे बीच में बहुत कम है. पर आज में आपको बताऊँ, हम इंसान हैं और खुद परमेश्वर ने हमें हीम्मत दी है की हम अपना रह खुद चुने। आप भूखे हैं तो विश्वास करें की हम खुदा के बच्चे हैं और वो हमारी ज़रूरतें पूरी करता है। शांत रहे, विष्वास करें और माने की वो हमें प्यार और शांति देगा। वो हमारी भूक मिटाएगा।

मैंने भद्दा  शब्द का भी प्रयोग किया था. अब जो आवाज़ें हमसे ये कहे की हमें प्यार करने वाला कोई नहीं, या ये कहें की हम किसी इन्सान के हवाले हैं वो आवाज़ भद्दी है। जब आप पिता के प्यार के अनुभवी बनेंगे तो आप उसके पुत्र और पवित्र आत्मा के विषय में जानकार बनें।  प्रभु की शांति आपके साथ रहे।