Thursday, 17 November 2016

पिता पुत्र और पवित्र आत्मा में हमारी विजय है।


नमस्कार। में लिंसन आपको अपने ब्लॉग पर पाके बेहद पर्सन हूँ।  आपने मुझे अपना समय चुराने का मौका दिया है, इस समय का में साद उपयोग करूँ ये मेरी जरूरत भी है और मेरी जिमेदारी भी. आप चाहे किसी भी मुल्क के हो, आप अपने को किसी भी जाती या समुदाय के मानते हो आप में मेरी दिलचस्पी सिर्फ इसलिए है की आप मेरे प्रभु परमेश्वर के संतान हो और इस हिसाब से परमेश्वर में आप मेरे भाई बंधू हो.

प्रभु येशु मसि के संतान अगर ऊंच नीच की बातें करें तो उसका परिचय प्रभु से अभी होनी बाकि है. प्रभु ने हमें अपने अपने अलग गुणों से हम सब को अलग बनाया जरूर हैं पर हमारी भिन्ताएं हमें दूसरों को नीच या ऊँचा   करार देने के लिए नहीं पर प्रभु की गुणवक्ता उसमें हम महसूस करें इस के लिए उसने हमें एक दुसरे से प्यार करने को बताया।

भारतीय समाज में इस विषय पर हमारी समझ बहुत भावुक और भद्दा है। भावुक इसलिए क्योंकि हम धार्मिक और आर्थिक व्यवस्था के अनुसार हम अपने को ही बड़ा या चोट मान लेतें है। भूक और गरीबी में हम पैसे वालों पर निर्भर हो जातें हैं। जिस खुदा ने हमें बनाया वो हमारी ज़र्रोरतें पूरी करने में सक्षम है ये बताने वाले हमारे बीच में बहुत कम है. पर आज में आपको बताऊँ, हम इंसान हैं और खुद परमेश्वर ने हमें हीम्मत दी है की हम अपना रह खुद चुने। आप भूखे हैं तो विश्वास करें की हम खुदा के बच्चे हैं और वो हमारी ज़रूरतें पूरी करता है। शांत रहे, विष्वास करें और माने की वो हमें प्यार और शांति देगा। वो हमारी भूक मिटाएगा।

मैंने भद्दा  शब्द का भी प्रयोग किया था. अब जो आवाज़ें हमसे ये कहे की हमें प्यार करने वाला कोई नहीं, या ये कहें की हम किसी इन्सान के हवाले हैं वो आवाज़ भद्दी है। जब आप पिता के प्यार के अनुभवी बनेंगे तो आप उसके पुत्र और पवित्र आत्मा के विषय में जानकार बनें।  प्रभु की शांति आपके साथ रहे। 

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